मंदिर आस्था के ऐसे पर्याय होते हैं, जहां विश्वास से
सिर झुक जाता है। मंदिर भगवान के ही नहीं, बल्कि पौराणिक पात्रों के भी
होते हैं।
महाभारत के कई पात्रों के मंदिर वर्तमान में भी हैं। इन पात्रों को भगवान की तरह पूजा जाता है। यह आस्था ही है, कि यहां आने वाले भक्तों की मुराद भी पूरी होती है।
गंधारी मंदिर: कर्नाटक के मैसूर में कौरवों की मां गांधारी का मंदिर है, जहां उनकी विधिवत् पूजा होती है। मंदिर का निर्माण 2008 में हुआ था।
भीष्म मंदिर: उत्तरप्रदेश के लाहाबाद में भीष्म पितामह का मंदिर है। यह एक अनोखा मंदिर बताया जाता है। संभवत: भीष्म पितामाह का मंदिर भारत में और कहीं नहीं है।
द्रौपदी मंदिर : 800 साल पुराना यह मंदिर धर्माया स्वमी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। कर्नाटक की राजधानी बैंगलुरू में मौजूद यह मंदिर काफी प्राचीन है।
शकुनि मंदिर: केरल के कोलम डिस्ट्रिक्ट के पवित्रेस्वरम में है। यहां शकुनि के भक्त उनके सकारात्मक पहलुओं को ध्यान में रखते हैं और उनकी नियमित पूजा करते हैं।
दुर्योधन मंदिर: पवित्रेस्वरम में ही शकुनि मंदिर के नजदीक दुर्योधन मंदिर है। कौरवों के सबसे बड़े भाई दुर्योधन की यहां विधिवत् पूजा होती है।
हिडिंबा मंदिर: हिडिंबा एक राक्षसी थी। इनका मंदिर हिमाचल प्रदेश के मनाली में है। यहां आज भी भक्त तामसिक प्रसाद अर्पित करते हैं।
महाभारत के कई पात्रों के मंदिर वर्तमान में भी हैं। इन पात्रों को भगवान की तरह पूजा जाता है। यह आस्था ही है, कि यहां आने वाले भक्तों की मुराद भी पूरी होती है।
गंधारी मंदिर: कर्नाटक के मैसूर में कौरवों की मां गांधारी का मंदिर है, जहां उनकी विधिवत् पूजा होती है। मंदिर का निर्माण 2008 में हुआ था।
भीष्म मंदिर: उत्तरप्रदेश के लाहाबाद में भीष्म पितामह का मंदिर है। यह एक अनोखा मंदिर बताया जाता है। संभवत: भीष्म पितामाह का मंदिर भारत में और कहीं नहीं है।
द्रौपदी मंदिर : 800 साल पुराना यह मंदिर धर्माया स्वमी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। कर्नाटक की राजधानी बैंगलुरू में मौजूद यह मंदिर काफी प्राचीन है।
शकुनि मंदिर: केरल के कोलम डिस्ट्रिक्ट के पवित्रेस्वरम में है। यहां शकुनि के भक्त उनके सकारात्मक पहलुओं को ध्यान में रखते हैं और उनकी नियमित पूजा करते हैं।
दुर्योधन मंदिर: पवित्रेस्वरम में ही शकुनि मंदिर के नजदीक दुर्योधन मंदिर है। कौरवों के सबसे बड़े भाई दुर्योधन की यहां विधिवत् पूजा होती है।
हिडिंबा मंदिर: हिडिंबा एक राक्षसी थी। इनका मंदिर हिमाचल प्रदेश के मनाली में है। यहां आज भी भक्त तामसिक प्रसाद अर्पित करते हैं।
कर्ण मंदिर:
उत्तराखंड के उत्तरकाशी में कर्ण का मंदिर मौजूद है। यह पूरा मंदिर
लकड़ियों से बना हुआ है। इस मंदिर में ही पांडवों के मंदिर भी मौजूद हैं।

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