मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के भारत में उनके कई प्रचलित मंदिर भी है, जो उस समय भी थे, और आज भी हैं। यह प्रमाण हैं कि भगवान श्रीराम ने त्रेतायुग में पृथ्वी की भारत भूमि पर जन्म लिया था।
रघुनाथ मंदिर: जम्मू-कश्मीर राज्य के जम्मू शहर में है मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का प्राचीन मंदिर। यह मंदिर रघुनाथ मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। सुंदर वास्तुकला और स्थापत्य से सजा मंदिर 1835 में महाराजा गुलाब सिंह ने बनवाना शुरू किया था, जो महाराजा रणजीत सिंह के काल में हुआ।
इस मंदिर में 7 ऐतिहासिक धार्मिक स्थल मौजूद है। मंदिर के भीतर दीवारों पर सोने की परत चढ़ी हुई है। रघुनाथ धाम में एक-दो नहीं बल्कि 33 करोड़ देवी देवताओं के दर्शनों का सौभाग्य भक्तों को मिलता है।
थिरुवंगड श्रीरामस्वामी मंदिर: भगवान श्रीराम का यह मंदिर केरल के कन्नूर जिले के थालास्सेरी में है। यह मंदिर 2000 वर्ष पुराना है। यहां सर्वप्रथम परशुराम ने विष्णु मंदिर का निर्माण करवाया था।
हरिहरनाथ मंदिर: बिहार के सारण और वैशाली जिले की सीमा में सोनपुर में स्थित है हरिहरनाथ मंदिर। मान्यता है कि यह मंदिर उस समय बनवाया गया होगा जब श्रीराम सीता के स्वयंवर में जा रहे थे। वर्तमान मंदिर का पुनः निर्माण राजा राम नारायण ने करवाया था।
त्रिप्रायर श्रीराम मंदिर: यह मंदिर केरल के दक्षिण-पश्चिमी शहर त्रिप्रायर में स्थित है। त्रिप्रायर नदी के किनारे स्थित त्रिप्रायर श्रीराम मंदिर कोडुन्गल्लुर का प्रमुख धार्मिक स्थान है। यह त्रिप्रायर में स्थित है, जो कोडुन्गल्लुर शहर से लगभग 15 किलोमीटर और त्रिशूर से 25 किलोमीटर दूर स्थित है।
किंवदंतियां है कि इस मंदिर में स्थापित मूर्ति तत्कालीन स्थानीय मुखिया को समुद्र तट पर मिली थी। इस मूर्ति में भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव के तत्व हैं अत: इसकी पूजा त्रिमूर्ति के रूप में की जाती है।
रामवन: भगवान श्रीराम का जन्म उत्तरप्रदेश के अयोध्या में हुआ है लेकिन रामवन मध्यप्रदेश में है। रामवन, मप्र के सतना जिले में है। कहते हैं त्रेतायुग में श्रीराम वनवास यात्रा पर यहां आए थे।
वर्तमान में रामवन लगभग 92,300 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले इस इलाके के पश्चिम में अबूझमाड़ पहाड़ियां तथा पूर्व में इसकी सीमा पर पूर्वी घाट शामिल हैं।

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