HospitalCrisis :जयपुर। राजस्थान के सबसे बड़े अस्पताल, सवाई मानसिंह (SMS) में इन दिनों मैनेजमेंट की हालत बिगड़ी हुई नजर आ रही है। मरीजों को डीडीसी काउंटर पर पूरी दवाइयां नहीं मिल रही हैं, और भर्ती मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त बैड भी नहीं हैं।
मौसमी बीमारियों का दौर शुरू होते ही स्थिति और विकट हो गई है। महिला जनरल मेडिसिन वार्ड में हालात इतने खराब हैं कि एक बैड पर दो-दो महिलाओं को लेटाकर इलाज किया जा रहा है।
शिफ्टिंग के बाद बढ़ी परेशानी
हाल ही में अस्पताल प्रशासन ने साउथ विंग फर्स्ट (SW1) में संचालित जनरल सर्जरी वार्ड को शिफ्ट करके जनरल मेडिसिन यूनिट के वार्ड 3DE की जगह पर स्थानांतरित कर दिया था। उस समय इस शिफ्टिंग पर डॉक्टरों और अन्य स्टाफ ने आपत्ति जताई थी, उनका कहना था कि जनरल मेडिसिन वार्ड में मरीजों की संख्या अधिक होती है और SW1 में जगह बहुत कम है। यहां बैड की संख्या केवल 40 है, जबकि 3DE वार्ड में बैड की संख्या 60 थी।
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भीड़ के कारण बंद करने पड़ रहे हैं वार्ड के गेट
SW1 वार्ड में जनरल मेडिसिन यूनिट 2 और 3 के महिला वार्ड में केवल 40 बैड ही उपलब्ध हैं, लेकिन वर्तमान में 50 से अधिक महिला मरीज भर्ती हैं। इस कारण से भीड़ इतनी बढ़ गई है कि अटेंडेंट को वार्ड के बाहर ही रोकना पड़ता है और मुख्य गेट को 24 घंटे बंद रखना पड़ता है।
आने वाले समय में और बढ़ेगी परेशानी
सितंबर से नवंबर के बीच मौसमी बीमारियों का पीक सीजन होगा। इस दौरान डेंगू, मलेरिया और इंफेक्शन के मरीजों की संख्या बढ़ेगी। हालांकि SW1 वार्ड में 50 से अधिक मरीजों को भर्ती करने की जगह नहीं है। पहले 3DE वार्ड में आवश्यकता पड़ने पर बैड की संख्या 60 से बढ़ाकर 100 तक की जा सकती थी, लेकिन अब यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।
जनरल सर्जरी वार्ड में भी समस्याएं
3DE वार्ड में जनरल सर्जरी यूनिट के शिफ्ट होने के बाद 60 बैड में से 20 बैड हटा दिए गए और केवल 40 बैड ही रखे गए हैं। इनमें से भी कई बैड खाली रहते हैं, जो कि मेडिकल यूनिट की शिफ्टिंग के बाद से हो रहा है।
लिफ्ट खराब होने से की गई अदला-बदली
जानकारों का कहना है कि साउथ विंग वार्ड में लिफ्ट की अनुपलब्धता के कारण यह अदला-बदली की गई। सर्जरी के बाद मरीजों को लाने-ले जाने के लिए रैम्प का उपयोग किया जा रहा है, क्योंकि लिफ्ट लंबे समय से खराब है।
अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल
इन व्यवस्थाओं में गड़बड़ी से मरीजों को हो रही असुविधा अस्पताल प्रशासन की कार्यक्षमता पर सवाल खड़े करती है। आने वाले समय में मौसमी बीमारियों के चलते स्थिति और खराब हो सकती है, जिससे मरीजों को और अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

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